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| UPI चार्ज पर बड़ा अपडेट: 2 अक्टूबर का ‘नो UPI डे’ वापस, जानें ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर नए MDR चार्ज का पूरा मामला |
UPI चार्ज पर बड़ा अपडेट: 2 अक्टूबर का ‘नो UPI डे’ वापस, जानें ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर नए MDR चार्ज का पूरा मामला
त्योहारी सीजन से पहले UPI पेमेंट को लेकर व्यापारियों और सरकार के बीच चल रही चर्चा में बड़ा बदलाव आया है। व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘नो UPI डे’ का फैसला वापस ले लिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। साथ ही व्यापारियों ने UPI चार्ज लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने समेत कई मांगें सरकार के सामने रखी हैं।
2 अक्टूबर का ‘नो UPI डे’ क्यों हुआ वापस?
नई दिल्ली में वित्त मंत्री के साथ हुई बैठक में अलग-अलग राज्यों के करीब 20 प्रमुख व्यापारी नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक का नेतृत्व चांदनी चौक से सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने किया।
बैठक के बाद व्यापारियों की ओर से बताया गया कि सरकार ने उनकी चिंताओं और मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। इसी आश्वासन के बाद 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का फैसला वापस लिया गया।
हालांकि, इससे पहले ‘नो UPI डे’ को लेकर कई तरह की खबरें सामने आई थीं। CAIT ने कुछ रिपोर्ट्स को गलत बताते हुए स्थिति स्पष्ट भी की थी।
UPI चार्ज को लेकर व्यापारियों की प्रमुख मांगें
व्यापारी संगठनों का कहना है कि त्योहारी सीजन में बाजार में डिजिटल भुगतान काफी बढ़ जाता है। ऐसे समय में अतिरिक्त शुल्क लागू होने से कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। इसलिए उन्होंने 15 अक्टूबर से प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज को फिलहाल टालने की मांग की है।
व्यापारियों ने सरकार के सामने ये प्रमुख सुझाव रखे हैं:
₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर क्या है MDR नियम?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, जिन बड़े व्यापारियों का मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख से अधिक है, उन्हें ₹2,000 से ज्यादा के प्रत्येक पात्र पेमेंट पर 0.40 प्रतिशत MDR और उस पर GST देना होगा। वहीं, ₹2,000 तक के पेमेंट पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।
यदि किसी छोटे व्यापारी का मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख तक है, तो उसे निर्धारित परिस्थितियों में शुल्क से राहत मिलेगी। लगातार तीन महीने तक ₹1 लाख से अधिक UPI कलेक्शन होने पर बैंक व्यापारी की श्रेणी बदल सकते हैं।
कुछ विशेष क्षेत्रों, जैसे पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल पेमेंट, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और एजुकेशन में ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.40 प्रतिशत के बजाय ₹5 की फ्लैट फीस का प्रावधान बताया गया है। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम MDR ₹300 प्लस GST तक सीमित रहेगा।
व्यापारी UPI चार्ज का विरोध क्यों कर रहे हैं?
व्यापारी संगठनों का तर्क है कि रिटेल कारोबार में मार्जिन सीमित होता है और अतिरिक्त डिजिटल पेमेंट लागत सीधे व्यापारिक खर्च बढ़ा सकती है। उनका कहना है कि UPI ने कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दिया है और व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दूसरी ओर, उपलब्ध नियमों के अनुसार प्रस्तावित UPI MDR कार्ड भुगतान की सामान्य दरों की तुलना में कम बताया गया है। MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट सुविधा उपलब्ध कराने से जुड़ी सेवाओं के लिए व्यापारी से लिया जाता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल व्यापारियों का ‘नो UPI डे’ वापस लेना इस मुद्दे पर बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत है। अब नजर सरकार द्वारा व्यापारियों की मांगों पर लिए जाने वाले अगले निर्णय पर रहेगी। खासकर 15 अक्टूबर से प्रस्तावित शुल्क को टालने और ₹5 लाख तक की छूट सीमा बढ़ाने की मांग पर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

