संगठन की शक्ति

संगठन की शक्ति
संगठन की शक्ति




संगठन की शक्ति


एक वन में बहुत बड़ा अजगर रहता था। वह बहुत ही अभिमानी और क्रूर था। जब यह बिल से निकलता, तो सब जीव उससे डर कर भाग खड़े होते। एक बार अजगर शिकार की तलाश में धूम रहा था। सारे जीव तो उसे बिल से निकाला देखकर ही भाग चुकी थे। जब उसे कुछ नहीं मिला जिससे वो अपनी भूख मिटा सके तो वह क्रोधित होकर फुफकारने लगा।

वहीं निकट में एक हिरणी अपने नवजात शिशु को पत्तियों के घर के नीचे छिपा बार खुद भोजन की तलाश में दूर गई थी। वह काफी दूर भोजन के तलाश में का चुकी थी। अजगर की फुफकार से हिरण का वह छोटा सा पत्तियों का घर उड़ने लगा और अजगर को हिरणी का बच्चा नजर आगाया। अजगर की नजर उन नवजात बच्चों पर परी और देखते ही देखते अजगर नवजात हिरण के बच्चे को निगल लिया। तब तक हिरणी भी लौट आयी थी। वह दूर से अपने बच्चों को  काल का ग्रास बनते देखती रही। वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकी। हिरनी ने शोक में किसी न किसी तरह अजगर से बदला लेने की ठान ली।
loading...

हिरणी की दोस्ती एक नेवले से थी। शोक में डूबी हिरणी अपने मित्र नेवले के पास गई और रोकर उसे अपनी दुःख भरी कहानी सुनायी। नेवले को भी हिरनी की कहानी सुन कर बहुत दुःख हुआ। वह दुःख भरे स्वर में बोला- मित्र , मेरे वश में होता तो मैं उस नीच अगजगर के दो टुकड़े कर डालता पर क्या करें , यह कोई छोटा - मोटा साँप नहीं है , जिसे मैं मार सकूँ।

संगठन की शक्ति
संगठन की शक्ति

लेकिन मेरे पास एक उपाय है। यहाँ पास में ही चीटियों का एक दल रहता है । वहाँ की रानी मेरी मित्र है , उससे सहायता मांग सकते हैं। हिरणी नेवले से बोली,"मित्र जब तुम्हारे जितना बड़ा जीव उस अजगर का कुछ बिगाड़ने में असमर्थ है , तो वह छोटी - सी चींटी क्या कर लेगी?"

 नेवल ने कहा - "ऐसा मत सोचो। उसके पास चीटियों की बहुत बड़ी सेना है। संगठन में बड़ी शक्ति होती है। अगर हम सभी एकसाथ मिल जाए तो उस बीच अजगर को बड़ी आसानी से उसकी करनी की सजा से सकते हैं।" नेवले की बात सुन्न कर हिरणी को कुछ आशा बँधी।

नेवला हिरणी को रानी चींटी के पास ले गया और उसे सारी कहानी सुनायी। चींटी की रानी ने सोच विचार कर कहा हम तुम्हारी सहायता करेंगे। बस तुम किसी तरह अजगर को इस रास्ते से आने पर मजबूर करो।  बाकी काम मेरी सेना पर छोड़ दो। दूसरे दिन नेवला अजगर के बिल के पास अपनी बोली बोलने लगा। अजगर को करने के लिए बुलाने लगा। अपने शत्रु की खुली चुनौती सुनते ही अजगर क्रोध में भर कर बिल से बाहर आया। नेवला उसे संकरे रास्ते वाली दिशा में दौड़ाया अजगर ने उसका पीछा किया। 

अजगर थकता तो नेवला मुर कर अजगर का मजाक उड़ने लगता और अजगर गुस्से में और तेजी से उसका पीछा करने लगता। इसी प्रकार नेवले ने उसे संकरीले रास्ते से गुजरने पर मजबूर कर दिया । नुकीले पत्थरों से अजगर का शरीर छीलने लगा जब तक अजगर उस रास्ते से बाहर आया तब तक उसका शरीर काफी छिल गया था और जगह - जगह से खून टपक रहा था। 

उसी समय चीटियों का दल अजगर पर हमला कर दिया। चीटियाँ उसके शरीर पर चढ़कर छिले स्थानों के पास को काटने लगी । अजगर तड़प उठा और अपने शरीर को पटकने लगा, जिससे उसकी स्तिथि और भी खराब होने लगी और नए नए  घाव भी बन गए। अब चीटियाँ को नये - नये स्थान आक्रमण करने को मिल गया। अब बेचारा अजगर अधमरा सा हो गया था। अब वह उन चिटियों का क्या बिगरपता । वे लाखों की संख्या में उस पा टूट पड़ी थी । कुछ ही देर मे अजगर तड़प - तड़प कर अपना दम तोड़ दिया। और इस तरह हिरनी का बदला भी पूरा हो गया। अजगर को उसके करनी का फल मिल गया।

सीख:-

इस कहानी से ये सीख मिलती है कि संगठन में बहुत शक्ति है। अगर कोई भी कार्य संगठित हो कर किया जाए तो कोई भी मुश्किल से मुश्किल कार्य भी किया जा सकता है।
loading...
loading...