गलत खान-पान से उपजता है पेप्टिक अल्सर

गलत खान-पान से उपजता है पेप्टिक अल्सर
गलत खान-पान से उपजता है पेप्टिक अल्सर
पेप्टिक अल्सर पाचनतंत्र में होने वाला एक प्रकार का फोड़ा है. अलसर दो तरह के होते हैं - अमाशय में होने वाला आमाशयी फोड़ा तथा गृहणी (डियोडेनम) में होने वाला ग्रहणी का फोड़ा. ग्रहणी का फोड़ा पेट के उत्तराद्ध में होता है. आमाशयी फोड़ा यानि गैस्ट्रिक अल्सर पेट में होता है.

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लम्बे समय तक इलाज न होने पर अलसर क्रोनिक हो जाता है. तब इसका इलाज दवाइयों से मुश्किल होता है. हर बीमारी की तरह ही इसका इलाज भी बीमारी की शुरुआत में आसान होता है और मरीज लम्बे खर्च और तकलीफों से बच सकता है.

स्त्री पुरुष की भिन्न शारीरिक बनावट के कारण ही उन्हें भिन्न तरीके की बिमारियों की सम्भवना होती है. दिल की बीमारी पुरुषों के मुकाबले में स्त्रियों को काम होती है. इसी तरह अलसर पुरुषों को ही अधिक होता है.
इसका मूल कारण खान-पान की आदत है. शराब, सिगरेट का सेवन पुरुष ही अधिक करते हैं लेकिन देखा जाए तो यह बीमारी आधुनिक समाज की दें ज़्यादा कही जा सकती है.

आज फास्टफूड का जमाना है. डिब्बाबंद खाने की चीजें, आर्टिफिशियल फ्लेवरयुक्त आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक्स, चॉकलेट, आये दिन की पार्टियाँ और उनमें गलत तरह का तेज मिर्च - मसाले युक्त तला हुआ भोजन आधुनिक जीवन का तौर तरीका बन गया है. 

यह रोग ऊँचे तबके में अधिक पाया जाता है. आमतौर पर शारीरिक श्रम कम करने वाले बड़े अधिकारी, बिजनेसमैन, डॉक्टर, दुकानदार, आदि इस रोग को ज्यादा आमंत्रित करते हैं. फिर भी कोई निश्चित नियम यहाँ लागु नहीं होता. कोई बार निचे तबके के लोग जैसे मजदुर वह निम्नवर्गीय आम आदमी भी इसके शिकार  पाये जाते हैं.

दरअसल गहरा मानसिक तनाव, कार्यबोझ, जिम्मेदारियाँ से होने होने वाली चिन्ता भी पेप्टिक अल्सर का कारण बन जाती है.

जैसे अक्सर कोई रोगों का कारण वंशानुगत होता है अल्सर भी वंशानुगत हो सकता है. इसके आलावा रक्त समूह का प्रभाब भी इसका कारण हो सकता जैसे 'ओ' समूह वाले लोगों में पेप्टिक अल्सर अन्य रक्त समूह वाले व्यक्तियों से अधिक पाया जाता है.

पेप्टिक अल्सर का लक्षण

पेट में हल्का या तेज दर्द जो घटता - बढ़ता प्रतीत हो सकता है. यह दर्द कभी - कभी रीढ़ की और लहर - सी मरता प्रतीत होता है. कभी-कभी दर्द के साथ उल्टी भी होती है. गैस्ट्रिक अल्सर के रागियों को खाना खाते ही दर्द महसूस होने लगता है. इसके मरीज मिर्च या तला हुआ खाना नहीं ले सकते, न ही कोई हार्ड ड्रिंक क्यों की उससे तकलीफ और भी बढ़ जाती है. अल्सर फट जाने पर आंतों का गंद पुरे पेट में फैल जाने पर स्थिति नाजुक हो सकती है.
डुओडेनिअल अल्सर के रोगियों को खाना खाने के घण्टे, डेढ़ घण्टे बाद दर्द शुरू होता है. आमतौर पर रोगी को उलटी नहीं होती.
खाना खाने के बाद पेट के ऊपरी हिस्से में होने वाला दर्द पेप्टिक अल्सर का लक्षण हो सकता है. इसके लिए तुरन्त उपचार होना जरूरी है. योग्य चिकित्सक की सलाह ली जनि चाहिए क्यों की अल्सर फटने पर होने वाली इंटरनल ब्लीडिंग कैंसर का कारण बन सकती है.

पेप्टिक अल्सर की उपचार  

'प्रिवेंशन इज बैटर देन क्योर' कहावत हर बीमारी की तरह यहाँ भी लागु होती है. बीमारी पैदा करने वाले कारणों से परहेज ही बेहतर है. गरिष्ठ भोजन तथा बहुत मिर्च मसाला युक्त तेज गर्म भोजन से परहेज करें.
आधुनिक चिकित्सा ने ऐसी दबाइयाँ ईजाद की हैं कि शल्यक्रिया की जरूरत कम ही पड़े. एक्सपर्ट  सलाह के अनुसार दबाएँ ली जनि चाहिए लेकिन ऑपरेशन की संभावना पूरी तरह नकारी नहीं जा सकती.
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