Health Tips ~ नेत्र रोग के घरेलू इलाज हिंदी में

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नेत्र रोग के घरेलू इलाज

आँख हमारे यंग का बेहद ही महत्वपूर्ण यंग है जिसकी मदद से हम इस खूबसूरत दुनिया को देखते है अपनों को देखते अच्छे बुरे की पहचान करते है आँख बहुत ही नाजुक होता है इसकी ध्यान रखना हमारे लिए बहुत ही जरूरी है आँखों कुछ रोग जो इससे बहुत प्रेसन करते है चलिए जानते है उन् रोगो के बारे में और उसे कैसे ठीक किया जा सकता है तो चलिए जानते है।

आँखों की सुरक्षा बहुत ही आवश्यक हैं। नेत्र दृष्टि बिना सब संसार सूना प्रतीत होता है अत: नेत्रों की सुरक्षा हेतु प्रात:काल ठन्डे जलसे आँखों को ८१० बार धोना चाहिए।
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त्रिफला (हर्र बहेड़ा, आँवला) के चूर्ण को १ चम्मच १० ग्राम लेकर ५०० ग्राम जल में मिट्टी के साफ बर्तन में जो पानी भरते भरते पुराना हो गया हो तो उसमें त्रिफला रात्रि में भिगों दें प्रात:काल उसके छने पानी से आँखे धोने से नेत्र के समस्त रोग दूर हो जाते हैं।

नोटआईवास नाम से प्लास्टिक का छोटा गिलास भी आता है उससे आँख धोने में सुविधा रहती है। ३. अन्धा भी देखें अर्थात् नेत्र शीध्र बढ़े चस्मा उतर जाएँ इस हेतु।

२० ग्राम त्रिफला चूर्ण को २५० ग्राम जल में धीरेधीरे पकाएँ चौथाई शेष रहने पर उतार कर छान लें फिर उसमें २१/२ ग्राम जल लौंह भस्म १०० पुटी की ३० पुड़िया बनाकर रख ले उसमें से १ पुडिया दवाई २ चम्मच देशी घी २ चम्मच चीनी (बूरा) मिलाकर प्रतिदिन पीने से नेत्र ज्योति शीध्र बढ़ जाती है। कम से कम २३ माह करते रहे। अन्धा भी देखने लगें।
नोट मिर्च, खटाई, कम खाएँ। ४. आईफ्लू पर पाईरिमोन डालें।

बेटनीसोल आई ड्राप्प डालने से ठीक होती है। आँखों पर काला चस्मा लगाए रखें। ५. फुली आँख फुली होने पर लाल चन्दन स्वच्छ पत्थर पर पानी (जल) से घिसकर लगाने से फुली कटा जाती है।

मोतियाबिन्द आँखों में मोतियाबिन्द होने न पाए इसके लिए पूर्व से ही इलाज करें।

होम्योपेथी में Cineraria-Maritima Eye dropsप्रतिदिन पूर्व से डालते रहें (मोतियाबिन्द नहीं आने पाऐगी।)

आईटोन ड्राप्स सामान्य आँख के रोगी को डालते रहने से आँखों के रोग दूर रहते हैं।

मोतियाबिन्द आने पर छट जाएँ ७८ हल्दी की छोटीछोटी गाँठें ७ दिन तक अमृत धारा में भिगोकर रखें। बाद में निकाल कर पत्थर पर घिसकर जल में लगाएँ।

आँख में पानी झरना निर्मली के बीच को पानी या गुलाब जल में घिसकर आँखों में आजने से पानी का गिरना बन्द हो जाता है।

रतौंधी सौंठ, कालीमिर्च, पीपलसमभाग शहद में पीसकर अंजन करनेसे रतौधी दूर हो जाती है।

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